खाद्य विभाग के पूर्व अफसर अब बोले- सबसे भ्रष्ट विभाग है यह

मिलावटी दूध, दही को लेकर मप्र शासन के खाद्य व औषधि प्रशासन विभाग द्वारा प्रदेश में चलाई जा रही मुहिम पर इसी विभाग के...


मिलावटी दूध, दही को लेकर मप्र शासन के खाद्य व औषधि प्रशासन विभाग द्वारा प्रदेश में चलाई जा रही मुहिम पर इसी विभाग के पूर्व जॉइंट डायरेक्टर डॉ. हितेश वाजपेयी ने सवाल खड़े किए हैं। उन्होेंने कार्रवाई को फर्जी बताते हुए कहा कि खाद्य व औषधि विभाग सबसे भ्रष्ट विभागों में से है, जहां फूड इंस्पेक्टर हर डेयरी, होटल से हजारों रुपए से लेकर लाखों रुपए तक की उगाही करता है। डॉ. वाजपेयी आजकल भाजपा के नेता हैं। शिवराज सरकार में नागरिक आपूर्ति निगम के अध्यक्ष और भाजपा मीडिया प्रभारी व प्रवक्ता भी रहे हैं। भास्कर से चर्चा में डॉ. वाजपेयी ने कहा सबसे ज्यादा लूट तो इसी विभाग के ड्रग इंस्पेक्टर द्वारा होती है। इनकी जांच की जाए तो ज्यादातर ड्रग इंस्पेक्टर करोड़ों की संपत्ति के मालिक निकलेंगे। उन्होंने कहा कई मिठाई, नमकीन की दुकानोें से कई अधिकारियों को नियमित तौर पर मुफ्त में खाद्य सामग्री जाती है। रही बात सैंपल की जांच की तो अधिकांश सैंपल की रिपोर्ट 10 से 15 हजार रुपए लेकर बदल दी जाती है, इसलिए अधिकांश रिपोर्ट में लिखा आ जाता है कि रिपोर्ट सामान्य है आदि।

डॉ. हितेश वाजपेयी

सिस्टम न बदल सके तो खुद को बदल लिया : बाजार में गलत दूध मिलता है, मैंने तो जर्सी गाय पाल ली थी

सरकार में रहते सिस्टम में सुधार के लिए आपने कदम नहीं उठाए, इस सवाल पर डॉ. वाजपेयी ने कहा विभाग में रहते ही मैंने फूड इंस्पेक्टर और कई लोगों को समझाने की कोशिश की, नियम-कानून भी बने, लेकिन सिस्टम नहीं बदल सका। इसलिए मैंने अपने बच्चोें को बाजार का दूध पिलाना ही बंद कर दिया और खुद ही जर्सी गाय पालकर शुद्ध दूध पिलाया। पूरे बाजार में मिलावटी दूध ही मिलता है। आज के दूध में मिलावट का जहर ज्यादा है।

और मिलावट पर कार्रवाई की विभागीय हकीकत

शहर की आबादी 24 लाख, 15 माह में दूध के लिए 214 सैंपल, 15 में ही लगाया अर्थदंड


कार्रवाई ऐसी : 5 साल में 50 केस जिला कोर्ट में गए मिलावट के, 20 केस में ही सजा, कोई जेल नहीं गया

बीते पांच सालों में विभाग ने 50 केस जिला कोर्ट में मिलावट के खिलाफ दायर किए हैं। इसमें से 20 मामलों में ही सजा हुई है। किसी को जेल नहीं हुई है। पीएफए एक्ट के तहत दूध में पानी मिलाने पर अर्थदंड का प्रावधान है और यूरिया, डिटरजेंट या हानिकारक मिलावट करने पर छह माह से अधिकतम तीन साल की सजा हो सकती है। यदि किसी की मौत हो जाती है तो इसमें आजीवन कारावास का प्रावधान है।